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बेस अस्पताल के ईएनटी विभाग में आधुनिक सुविधाओं से मिल रहा तृतीयक उपचार

अल्मोड़ा। राज्य सरकार की प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की पहल का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों तक तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी दिशा में मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध बेस अस्पताल का ईएनटी (नाक, कान एवं गला) विभाग अल्मोड़ा, बागेश्वर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। विभाग में मरीजों की विस्तृत श्रवण जांच के लिए ओएई (ओटोअकॉस्टिक एमिशन) और बीईआरए (ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिस्पॉन्स ऑडियोमेट्री) जैसी अत्याधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही आधुनिक ईएनटी वर्कस्टेशन के माध्यम से कान, नाक और गले की एंडोस्कोपिक जांच की जा रही है, जिससे रोगों की शुरुआती अवस्था में पहचान और उपचार संभव हो रहा है। इससे मरीजों को कम खर्च में बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार गले और मुंह की अंदरूनी सतह के कैंसर के मामलों में राज्य में लगातार वृद्धि हो रही है। शराब और तंबाकू का सेवन इसके प्रमुख कारणों में शामिल है। पहले एंडोस्कोपिक जांच की सीमित सुविधा के कारण कई मरीजों का समय पर निदान नहीं हो पाता था, लेकिन अब बेस अस्पताल में सिर एवं गर्दन के ट्यूमर और कैंसर का समय रहते पता लगाकर आवश्यकतानुसार बायोप्सी, सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी जैसी उपचार सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अस्पताल में हाइपरबैरिक ऑक्सीजन थेरेपी (एचबीओटी) की सुविधा भी शुरू की गई है। यह उपचार अचानक सुनने की क्षमता कम होने, चेहरे के पक्षाघात और लंबे समय से न भरने वाले घावों के उपचार में प्रभावी माना जाता है। ईएनटी विभाग में मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस विद्यार्थियों को भी आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें रोगों के उन्नत निदान के साथ नेविगेशन-असिस्टेड सर्जरी, नाक, पैरानैजल साइनस और स्कल बेस सर्जरी जैसी अत्याधुनिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा रही है। भविष्य की योजनाओं के तहत विभाग में हियरिंग एड, कॉक्लियर इम्प्लांट और पुनर्वास सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इससे विशेष रूप से मूक-बधिर बच्चों और श्रवण बाधित मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अब तक उपचार के लिए महानगरों का रुख करना पड़ता था।