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जन्म से दिव्यांग बच्चों को भी मिल सकती है पेंशन, उत्तराखंड में 90,750 लाभार्थी ले रहे सहायता

AltnewsUttarakhand 16/10/2026 1 minute read
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देहरादून। जन्म से दिव्यांग बच्चों को भी पेंशन का लाभ मिलने की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार की नई व्यवस्था में न्यूनतम आयु की शर्त हटाए जाने से उत्तराखंड के हजारों दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों को आर्थिक सहायता मिल सकती है। हालांकि, प्रदेश में इस व्यवस्था को लागू करने के लिए केंद्र के दिशा-निर्देशों का इंतजार है।

समाज कल्याण विभाग के सामाजिक सुरक्षा राज्य पोर्टल के वित्तीय वर्ष 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में वर्तमान में 90,750 दिव्यांग पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। इनके लिए 81 करोड़ 78 लाख रुपये से अधिक की राशि दर्ज है। जिलेवार आंकड़ों में हरिद्वार 13,818 लाभार्थियों के साथ पहले स्थान पर है। ऊधम सिंह नगर में 12,909, देहरादून में 11,877 और टिहरी गढ़वाल में 8,842 दिव्यांग पेंशन ले रहे हैं।

इसके अलावा अल्मोड़ा में 7,771, पौड़ी गढ़वाल में 7,409, नैनीताल में 6,674, उत्तरकाशी में 5,110, पिथौरागढ़ में 3,878, चमोली में 3,710, बागेश्वर में 3,371, चंपावत में 2,885 और रुद्रप्रयाग में 2,496 लाभार्थी पेंशन योजना से जुड़े हैं।

अब तक केंद्रीय योजना के तहत 18 से 79 वर्ष की आयु के पात्र गंभीर या बहु-दिव्यांगता वाले लोगों को सहायता दी जाती थी। नई व्यवस्था में न्यूनतम आयु की शर्त समाप्त होने से जन्म से दिव्यांग बच्चे भी अन्य निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करने पर लाभ पा सकेंगे। केंद्र सरकार के अनुसार, संशोधित नियमों को दिशा-निर्देश जारी होने के तीन महीने के भीतर लागू किया जाना है।

प्रदेश में मौजूदा दिव्यांग पेंशन योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रतिमाह 1,500 रुपये दिए जाते हैं। राज्य योजना में आयु सीमा 18 से 59 वर्ष है। गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों की वार्षिक आय 48 हजार रुपये से कम होनी चाहिए। बीपीएल परिवारों के लाभार्थियों को 300 रुपये केंद्रीय अंश और 1,200 रुपये राज्यांश के रूप में मिलते हैं, जबकि अन्य पात्र लाभार्थियों को राज्य सरकार की ओर से 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। पात्र कुष्ठ रोगियों के लिए 1,000 रुपये मासिक पेंशन का प्रावधान है।

समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजय खेतवाल के अनुसार, प्रदेश में 40 प्रतिशत दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा पहले से लागू है। नई व्यवस्था से जन्म से दिव्यांग बच्चों को भी आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता खुल सकता है। राज्य में इसके क्रियान्वयन और पात्रता प्रक्रिया को लेकर केंद्र के दिशा-निर्देशों के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

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