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लोकसभा जीते पर राज्यसभा सीट खोने का खतरा, हरियाणा में फंसी कांग्रेस

AltnewsUttarakhand 13/06/2024
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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता दीपेंदर हुड्डा हरियाणा की रोहतक लोकसभा सीट से चुनाव जीत गए हैं। अब उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना होगा, जिस पर दोबारा चुनाव होगा। इस तरह कांग्रेस को लोकसभा की एक सीट मिल गई है, लेकिन राज्यसभा में एक सीट छिनने का भी खतरा है। इसकी वजह यह है कि हरियाणा विधानसभा के ज्यादातर सदस्य भाजपा के पक्ष में हैं। इसके अलावा क्रॉस वोटिंग भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में हुड्डा की यह सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के विधायक और कुछ निर्दलीय क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। ऐसा हुआ तो फिर कांग्रेस के लिए जीत संभव नहीं होगी।
दीपेंदर हुड्डा 2020 में राज्यसभा पहुंचे थे और उनका कार्यकाल 2026 तक के लिए था। मौजूदा स्थिति में भाजपा मजबूत दिखती है। उसके अपने विधायकों के अलावा जेजेपी का एक गुट, कुछ निर्दलीय और एक विधायक वाली पार्टियां उसके पक्ष में हैं। नियम के अनुसार यदि कोई राज्यसभा का सांसद लोकसभा के लिए चुना जाता है तो फिर उसे अपनी सीट छोड़नी होती है। ऐसे में रोहतक से जीत के बाद दीपेंदर हुड्डा की राज्यसभा सीट खाली हो गई है। अब चुनाव आयोग को राज्यसभा सीट पर उपचुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी करना होगा। नियम के मुताबिक 6 महीने के भीतर ही चुनाव हो जाना चाहिए।
माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस सीट पर इलेक्शन हो सकता है। कांग्रेस एक विधायक वरुण चौधरी अब अंबाला लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं। इस तरह विधानसभा की संख्या 87 ही रह गई है। यहां बहुमत का आंकड़ा 44 ही है। वहीं जेजेपी के कुल 10 विधायक हैं, लेकिन खेमेबाजी है। दो विधायकों ने खुलकर भाजपा का साथ दिया है। उसके एक विधायक देवेंदर सिंह बबली तो कांग्रेस का लोकसभा चुनाव में समर्थन कर चुके हैं। इसके अलावा एक अन्य विधायक रामकुमार गौतम भी जेजेपी लीडरशिप से नाराज हैं। राज्य में कांग्रेस के 29 विधायक हैं और उसे तीन का समर्थन हासिल है। इस तरह विपक्ष की संख्या राज्य में 32 है।

जेजेपी के कुछ और विधायक कर सकते हैं क्रॉस वोटिंग
वहीं भाजपा के 41 विधायक हैं और गोपाल कांडा एवं नयनपाल रावत का उसे समर्थन हासिल है। इनोलो के इकलौते विधायक अभय चौटाला और निर्दलीय बलराज कुंडू अब तक भाजपा के खिलाफ ही रहे हैं। लेकिन जेजेपी के कुछ और विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। बता दें कि राज्यसभा में विधायक किसी भी कैंडिडेट को वोट कर सकते हैं और उन पर कोई दल ऐक्शन भी नहीं ले सकता। ऐसे ही एक मामले में फैसला सुनाते हुए 22 अगस्त, 2006 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विधायक यदि राज्यसभा में दूसरे दल के नेता को वोट करता है तो उसकी मेंबरशिप खारिज नहीं हो सकती।

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