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पिरूल से बायो-ब्रिकेट निर्माण पर 40 स्वयंसेवी अग्निशमन कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण

AltnewsUttarakhand 01/01/2026 1 minute read
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अल्मोड़ा(आरएनएस)। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, कोसी–कटारमल अल्मोड़ा के ग्रामीण तकनीकी परिसर में 29–30 दिसंबर को वनाग्नि शमन एवं रोकथाम परियोजना के अंतर्गत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम द हंस फाउंडेशन, देहरादून के सहयोग से आयोजित हुआ, जिसमें अल्मोड़ा और बागेश्वर जनपद के हवालबाग, ताकुला, गरुड़ और बागेश्वर विकासखंडों से चयनित 40 स्वयंसेवी अग्निशमन कर्मियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य चीड़ की सूखी पत्तियों यानी पिरूल से बायो-ब्रिकेट तैयार कर वनाग्नि की घटनाओं को कम करना तथा स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर विकसित करना रहा। उद्घाटन सत्र में संस्थान के निदेशक आई. डी. भट्ट ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रतिभागियों को द हंस फाउंडेशन की परियोजना से जुड़ने पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पिरूल से जैव ईंधन, हस्तनिर्मित कागज और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार कर न केवल जंगलों में आग की समस्या को कम किया जा सकता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने इन उत्पादों के विपणन के लिए मूल्य शृंखला विकास और विभिन्न विभागों, शोध संस्थानों तथा गैर-सरकारी संगठनों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। द हंस फाउंडेशन के परियोजना प्रबंधक नागेन्द्र तंगवान ने वनाग्नि शमन एवं रोकथाम परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी और प्रशिक्षण से परियोजना क्षेत्र में होने वाले लाभों को रेखांकित किया। तकनीकी सत्रों में डी. एस. बिष्ट ने पिरूल से बायो-ब्रिकेट तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। दूसरे दिन देवेंद्र चौहान और स्पर्धा संस्था के निदेशक दीप चंद्र बिष्ट ने पिरूल से हस्तनिर्मित कागज बनाने की तकनीक की जानकारी देते हुए इससे जुड़ी रोजगार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण के समापन सत्र में संस्थान परिसर स्थित सूर्यकुंज में सभी प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। निदेशक आई. डी. भट्ट ने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान अर्जित तकनीकी ज्ञान को अपने-अपने क्षेत्रों में प्रसारित करने का आह्वान किया।

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