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नालों की सफाई नहीं, घरों में घुसा मलबा; पांडेखोला में नगर निगम के खिलाफ फूटा गुस्सा

AltnewsUttarakhand 20/07/2026
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अल्मोड़ा। लगातार हो रही बारिश ने पांडेखोला क्षेत्र में नगर निगम की तैयारियों और जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। नगर निगम के लंबे समय से बंद पड़े नाले और राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के जाम कल्वर्ट के कारण बारिश का पानी और भारी मात्रा में मलबा सीधे रिहायशी क्षेत्र में घुस गया। कई मकानों के आंगन और छतों तक मलबा पहुंचने से लोगों को भारी परेशानी और नुकसान का सामना करना पड़ा, जिससे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम का नाला लंबे समय से बंद पड़ा है, जबकि एनएच का कल्वर्ट भी जाम होने के कारण वर्षा जल की निकासी नहीं हो सकी। इसका परिणाम यह हुआ कि पानी और मलबा सीधे घरों तक पहुंच गया। घटना की सूचना आपदा विभाग को दी गई, जिसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। हालांकि लोगों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बावजूद नगर निगम की कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची। क्षेत्र की पार्षद ज्योति साह ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि आपदा जैसी स्थिति में भी नगर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने बताया कि मजबूरी में स्थानीय लोगों ने स्वयं धन एकत्र कर मजदूर लगाए और मलबा हटाने का कार्य शुरू कराया। उनका कहना था कि यदि समय रहते नालों और कलमठ की नियमित सफाई कराई गई होती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। पार्षद ने नगर निगम से बंद नालों की तत्काल सफाई कराने, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी की ओर से मानसून के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, लेकिन नगर निगम उन निर्देशों का पालन करता नजर नहीं आ रहा है, जो गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। बारिश के बाद पांडेखोला क्षेत्र के लोगों में नगर निगम के खिलाफ भारी रोष है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष मानसून में ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। लोगों ने मांग की है कि बरसात के दौरान आपदा संभावित क्षेत्रों में नियमित निगरानी रखी जाए, बंद नालों की तत्काल सफाई कराई जाए और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए।

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