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‘डिजिटल हाउस अरेस्ट’ के नाम पर 8.80 लाख की ठगी, हरियाणा से साइबर ठग गिरफ्तार

AltnewsUttarakhand 24/07/2026 1 minute read
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अल्मोड़ा। फर्जी पुलिस और जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर एक व्यक्ति को “डिजिटल हाउस अरेस्ट” में रखने और 8.80 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले आरोपी को अल्मोड़ा पुलिस ने हरियाणा से गिरफ्तार किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर घोड़के के निर्देशन में हुई कार्रवाई में आरोपी को जिला सिरसा से दबोचा गया।

पुलिस के अनुसार भतरौजखान थाना क्षेत्र के धारड़ निवासी जीवन सिंह रावत ने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात लोगों ने स्वयं को पुलिस और जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए आतंकवाद से जुड़े फर्जी मामले में नाम आने का डर दिखाया। आरोपियों ने उन्हें कथित “डिजिटल हाउस अरेस्ट” में रखकर जेल भेजने की धमकी दी और विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों से 8.80 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। शिकायत के आधार पर थाना भतरौजखान में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

विवेचना के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और साइबर विश्लेषण के आधार पर पुलिस को हरियाणा के सिरसा जिले के जगमालवाली गांव निवासी रंजोत सिंह की संलिप्तता के साक्ष्य मिले। इसके बाद थानाध्यक्ष अवनीश कुमार के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने साइबर और सर्विलांस टीम की मदद से 22 जुलाई को आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस जांच में सामने आया कि 10 मार्च को पीड़ित को व्हाट्सएप पर कॉल कर खुद को एटीएस पुणे का इंस्पेक्टर सुमित मिश्रा बताने वाले ठग ने आतंकवाद के फर्जी मामले में नाम होने की बात कही। इसके बाद नकली दस्तावेज और कोर्ट के आदेश भेजकर गिरफ्तारी की धमकी दी गई। अलग-अलग नंबरों से लगातार वीडियो कॉल कर पीड़ित को किसी से बात न करने, हर घंटे रिपोर्ट करने और मोबाइल सर्विलांस पर होने का झांसा देकर मानसिक रूप से भयभीत किया गया।

आरोपियों ने पीड़ित से गूगल पे पर खाता बनवाकर अपनी ईमेल आईडी लॉगिन कराई तथा वीडियो कॉल के जरिए बैंक खातों और कार्डों को सक्रिय कराया। इसके बाद 18 से 31 मार्च के बीच जांच के नाम पर डरा-धमकाकर नौ अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल 8.80 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।

अल्मोड़ा पुलिस ने लोगों से अपील की है कि “डिजिटल अरेस्ट” या “डिजिटल हाउस अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल या फोन पर डराकर पैसे मांगता है तो उस पर विश्वास न करें। ऐसे मामलों की तत्काल सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में दें।

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