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रीप परियोजना ने बदली हेमा देवी की तकदीर, पशुपालन से बनी आत्मनिर्भर

AltnewsUttarakhand 13/07/2026 1 minute read
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष के सहयोग से संचालित ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि (रीप) परियोजना ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन रही है। द्वाराहाट विकासखंड के पैठानी गांव की हेमा देवी इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं, जिन्होंने परियोजना के सहयोग से पशुपालन को सफल व्यवसाय बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की है। पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी हेमा देवी के कंधों पर आ गई। उनके पास केवल एक देशी गाय थी, जिससे सीमित मात्रा में दूध मिलता था और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था। दिव्यांग पुत्र की देखभाल और सीमित संसाधनों के बीच जीवन-यापन उनके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। रीप परियोजना से जुड़ने के बाद हेमा देवी ने आधुनिक पशुपालन, डेयरी प्रबंधन, पशुओं के पोषण, स्वच्छता और टीकाकरण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। परियोजना के तहत मिली आर्थिक सहायता से उन्होंने उन्नत नस्ल की दुग्धारू गाय खरीदी और वैज्ञानिक तरीके से डेयरी व्यवसाय शुरू किया। साथ ही उन्हें दुग्ध विपणन और पशुओं के बेहतर रखरखाव का प्रशिक्षण भी दिया गया। आज हेमा देवी प्रतिदिन लगभग आठ लीटर दूध का उत्पादन कर रही हैं। दूध और घी की बिक्री से उन्हें करीब 18 हजार रुपये प्रतिमाह की नियमित आय हो रही है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वह अपने दिव्यांग पुत्र की बेहतर देखभाल के साथ परिवार की जरूरतें आत्मनिर्भर होकर पूरी कर रही हैं। हेमा देवी का कहना है कि रीप परियोजना से मिले प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग के बिना पशुपालन को व्यवसाय के रूप में विकसित करना संभव नहीं था। अब वह स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। रीप परियोजना के माध्यम से अल्मोड़ा जिले में पशुपालन, कृषि आधारित उद्यम, हस्तशिल्प और अन्य आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह परियोजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सहायता के साथ कौशल विकास और बाजार से जोड़कर स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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